WhatsApp WhatsApp Channel NEW
Join Now →
Play Store Android App FREE
Get Now →
Home » Class 10 HINDI (E) » HSLC Hindi (E) Paper 2025 With Answer

HSLC Hindi (E) Paper 2025 With Answer

📝 HSLC Hindi (E) Paper 2025 With Answer

Full Marks
100
Pass Marks
30

GROUP—A (खण्ड—क)

(पूर्णांक : 50)
1

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर पूर्ण वाक्य में दो : (1×4=4)

(क) ठोस सत्य सदा क्या होता है?

उत्तर: ठोस सत्य सदा अनुभव पर आधारित होता है।

(ख) ईसाई धर्म को किसने अमर बनाया था?

उत्तर: ईसाई धर्म को उन लोगों की शहादत ने अमर बनाया था जिन्होंने उस पर चलकर अपने जीवन को बलिदान कर दिया।

(ग) छोटे जादूगर के बापू जी कहाँ हैं?

उत्तर: छोटे जादूगर के बापू जी देश के लिए जेल में हैं।

(घ) ‘भोलाराम का जीव’ शीर्षक कहानी का कहानीकार कौन है?

उत्तर: ‘भोलाराम का जीव’ शीर्षक कहानी के कहानीकार हरिशंकर परसाई हैं।
2

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर संक्षेप में दो : (2×9=18)

(क) “मुझ पर कोई खड़ा रहना पसंद नहीं करता है।” यह वाक्य कौन कहता है? खड़े रहना पसंद न करने का एक कारण लिखो।

उत्तर: यह वाक्य ‘नींव की ईंट’ पाठ में से ईंट कहती है। उस पर किसी का खड़ा रहना इसलिए पसंद नहीं है क्योंकि खड़ा रहने वाला व्यक्ति उसके मौन बलिदान को समझे बिना केवल उसके अस्तित्व को रौंदता है, जो उसे अपमानजनक लगता है।

(ख) “जरूरत है ऐसे नौजवानों की जो इस कार्य में अपने को चुपचाप खपा सकते हैं।” इसका आशय स्पष्ट करो।

उत्तर: इस पंक्ति का आशय यह है कि देश और समाज की उन्नति के लिए ऐसे युवाओं की आवश्यकता है जो नाम और प्रसिद्धि के मोह के बिना, चुपचाप और निस्वार्थ भाव से अपना योगदान दे सकें, ठीक उसी तरह जैसे नींव की ईंटें इमारत को मजबूती देने के लिए खुद को गुमनामी में छिपा लेती हैं।

(ग) ‘भोलाराम का जीव’ शीर्षक कहानी का उद्देश्य क्या है?

उत्तर: ‘भोलाराम का जीव’ कहानी का मुख्य उद्देश्य सरकारी कार्यालयों में व्याप्त भ्रष्टाचार, लालफीताशाही और संवेदनहीनता पर व्यंग्यात्मक प्रहार करना है। यह कहानी दिखाती है कि कैसे एक आम आदमी का जीवन और मृत्यु भी इस व्यवस्था की भेंट चढ़ जाता है।

(घ) छोटे जादूगर के किन चारित्रिक गुणों ने लेखक को प्रभावित किया है?

उत्तर: लेखक छोटे जादूगर के स्वाभिमान, आत्मनिर्भरता, मातृभक्ति, और कठिन परिस्थितियों में भी अपनी जिम्मेदारी समझने जैसे गुणों से बहुत प्रभावित हुए। वह अपनी उम्र से कहीं अधिक परिपक्व और मेहनती था।

(ङ) कबीर साखी में ‘कस्तूरी का मृग’ (मिरग) के जरिए क्या कहना चाहते हैं?

उत्तर: कबीर ‘कस्तूरी मृग’ के उदाहरण से कहना चाहते हैं कि जिस प्रकार हिरण अपनी ही नाभि में स्थित कस्तूरी की सुगंध को जंगल भर में खोजता फिरता है, उसी प्रकार मनुष्य भी ईश्वर को मंदिरों और तीर्थों में खोजता है, जबकि ईश्वर उसके अपने हृदय में ही विराजमान हैं।

(च) सुंदर श्याम की आराधना करने वाली मीराँ मनुष्य को राम-नाम-रस पीने की मंत्रणा क्यों देती हैं?

उत्तर: मीराँ मनुष्य को राम-नाम-रस पीने की मंत्रणा इसलिए देती हैं क्योंकि उनका मानना है कि यही एकमात्र सच्चा रस है जो सांसारिक मोह-माया से मुक्ति दिलाता है और जन्म-मरण के चक्र से छुड़ाकर अमरता प्रदान करता है।

(छ) कलम की ताकत क्या है?

उत्तर: कलम की ताकत विचारों को जन्म देने, समाज में क्रांति लाने, ज्ञान का प्रकाश फैलाने और दिलों को जोड़ने में निहित है। यह तलवार से भी अधिक शक्तिशाली है क्योंकि इसका प्रभाव स्थायी और गहरा होता है।

(ज) मृत्तिका कैसे चिन्मयी शक्ति के रूप में उभरती है?

उत्तर: जब कुम्हार मिट्टी को अपने हाथों से आकार देकर, उसे आग में तपाकर एक सुंदर और उपयोगी पात्र (जैसे- घड़ा) बना देता है, तब वह साधारण मिट्टी न रहकर एक कलाकृति बन जाती है। इस प्रकार, एक जड़ वस्तु (मिट्टी) सृजन की प्रक्रिया से गुजरकर एक चिन्मयी शक्ति (आध्यात्मिक या कलात्मक रूप) में उभरती है।

(झ) गरीबी की बीमारी के संबंध में भोलाराम की पत्नी ने नारद के सामने क्या कहा है?

उत्तर: गरीबी की बीमारी के संबंध में भोलाराम की पत्नी ने नारद से कहा कि कोई उन्हें पांच-दस रुपये भी दे देता तो वे उसकी दवा-दारू कर लेते, पर किसी ने मदद नहीं की।
3

“शहादत और मौन-मूक! समाज की आधारशिला यही होती है।” लेखक ने यहाँ किस समाज की आधारशिला की बात कही है, स्पष्ट करो। (4)

उत्तर: लेखक ने यहाँ उस समाज की आधारशिला की बात कही है जो प्रगतिशील, मजबूत और स्थायी होता है। इस समाज की नींव उन गुमनाम शहीदों और निस्वार्थ कार्यकर्ताओं के बलिदान पर टिकी होती है जो प्रशंसा या प्रसिद्धि की इच्छा के बिना चुपचाप अपना कर्तव्य निभाते हैं। जैसे एक इमारत नींव की ईंटों पर खड़ी होती है जो दिखाई नहीं देतीं, वैसे ही एक महान समाज उन लोगों के मौन त्याग पर खड़ा होता है जो खुद को समाज की भलाई के लिए समर्पित कर देते हैं।
4

निम्नलिखित अवतरणों की सप्रसंग व्याख्या करो : (4×2=8)

(क) जिन ढूँढ़ा तिन पाइयाँ, गहरे पानी में पैठ। जो बौरा डूबन डरा, रहा किनारे बैठ।

उत्तर:

प्रसंग: प्रस्तुत दोहा हमारी पाठ्यपुस्तक के ‘कबीर साखी’ नामक पाठ से लिया गया है। इसके रचयिता संत कबीरदास जी हैं। इसमें कबीर ने परिश्रम और साहस का महत्व बताया है।

व्याख्या: कबीरदास जी कहते हैं कि जिन्होंने हिम्मत करके गहरे पानी में गोता लगाया, उन्होंने कुछ-न-कुछ (जैसे मोती) अवश्य पाया। लेकिन जो मूर्ख डूबने के डर से किनारे पर ही बैठा रहा, उसे कुछ भी हाथ नहीं लगा। इसका भाव यह है कि जीवन में सफलता और ज्ञान उन्हीं को मिलता है जो जोखिम उठाते हैं और कठोर परिश्रम करते हैं। जो लोग डरकर प्रयास ही नहीं करते, वे जीवन में कुछ भी हासिल नहीं कर पाते।

(ख) जब लागी तब कोऊँ न जाने, अब जानी संसार। किरपा कीजै, दरसन दीजै, सुध लीजै तत्काल। मीराँ कहै प्रभु गिरधर नागर चरण-कमल बलिहार।

उत्तर:

प्रसंग: प्रस्तुत पद हमारी पाठ्यपुस्तक में संकलित ‘मीराँ के पद’ से लिया गया है। इसकी रचयिता कृष्ण-भक्त कवयित्री मीराँबाई हैं। इसमें वे अपने कृष्ण-प्रेम की तीव्रता और दर्शन की व्याकुलता व्यक्त कर रही हैं।

व्याख्या: मीराँबाई कहती हैं कि जब मुझे श्रीकृष्ण से प्रेम हुआ, तब किसी को पता नहीं चला, लेकिन अब मेरे इस प्रेम के बारे में सारा संसार जान गया है। वे प्रभु से प्रार्थना करती हैं, “हे प्रभु! अब कृपा करके मुझे दर्शन दीजिए और तुरंत मेरी सुध लीजिए (मेरा हाल जानिए)।” मीराँ कहती हैं कि हे मेरे प्रभु गिरधर नागर, मैं आपके चरण-कमलों पर न्योछावर हूँ।

5

(क) निम्नलिखित में से किन्हीं दो मुहावरों का वाक्यों में प्रयोग करो : (1×2=2)
घड़ी समीप होना ; दंग रह जाना ; श्रीगणेश होना ; नौ-दो ग्यारह होना

उत्तर:

दंग रह जाना: ताजमहल की सुंदरता देखकर विदेशी पर्यटक दंग रह गए।

श्रीगणेश होना: आज हमने अपनी नई दुकान का श्रीगणेश किया है।

(ख) निम्नलिखित में से किन्हीं चार के लिंग-परिवर्तन करो : (½×4=2)
रस्सी ; श्रीमान् ; जादूगर ; वर ; स्त्री ; बालक ; मालिन ; कवि

उत्तर:

श्रीमान् – श्रीमती

जादूगर – जादूगरनी

वर – वधू

बालक – बालिका

(ग) निम्नलिखित में से किन्हीं दो की संधि करो : (1×2=2)
अन्न+अभाव ; मनः+हर ; अनु+अय ; उत्+भव

उत्तर:

अन्न + अभाव = अन्नाभाव

मनः + हर = मनोहर

(घ) निम्नलिखित में से किन्हीं चार के बहुवचन रूप बनाओ : (½×4=2)
आँख ; छाया ; बिल्ली ; कहानी ; दुकान ; औरत ; बहू ; कविता

उत्तर:

आँख – आँखें

कहानी – कहानियाँ

दुकान – दुकानें

औरत – औरतें

(ङ) निम्नलिखित में से किन्हीं चार के एक-एक पर्यायवाची शब्द लिखो : (½×4=2)
जंगल ; आनंद ; आँख ; पुष्प ; हाथी ; मछली

उत्तर:

जंगल – वन

आनंद – हर्ष

आँख – नयन

पुष्प – फूल

(च) निम्नलिखित अनेक शब्दों के लिए एक-एक शब्द लिखो (किन्हीं चार के) : (½×4=2)
विष्णु का उपासक ; जिसके हृदय में दया नहीं है ; जो विधि के विरुद्ध है ; जो लोक में संभव न हो ; जिसके पार देखा जा सके ; जिसे ईश्वर अथवा वेद पर विश्वास है

उत्तर:

विष्णु का उपासक – वैष्णव

जिसके हृदय में दया नहीं है – निर्दयी

जो विधि के विरुद्ध है – अवैध

जिसे ईश्वर अथवा वेद पर विश्वास है – आस्तिक

(छ) निम्नलिखित में से किन्हीं चार के विलोमार्थक शब्द दो : (½×4=2)
आशा ; आरंभ ; निर्मल ; सूक्ष्म ; धनी ; शाप ; नीरस

उत्तर:

आशा – निराशा

आरंभ – अंत

धनी – निर्धन

शाप – वरदान

(ज) निम्नलिखित वाक्यों में से किन्हीं दो को शुद्ध करो : (1×2=2)
(i) मैंने नदी देखा है।
(ii) मैं आपका दर्शन चाहता हूँ।
(iii) यह मात्र आप पर निर्भर करता है।

उत्तर:

(i) मैंने नदी देखी है।

(ii) मैं आपके दर्शन करना चाहता हूँ।

GROUP—B (खण्ड—ख)

(पूर्णांक : 50)
6

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर पूर्ण वाक्य में दो : (1×5=5)

(क) हरिवंश राय ‘बच्चन’ की पठित कविता का नाम क्या है?

उत्तर: हरिवंश राय ‘बच्चन’ की पठित कविता का नाम ‘जो बीत गई’ है।

(ख) “दे न दुहाई पीठ फेर कर!” यहाँ ‘पीठ फेर कर’ मुहावरे का अर्थ क्या है?

उत्तर: यहाँ ‘पीठ फेर कर’ मुहावरे का अर्थ है विपत्ति से घबराकर भाग जाना या मुकाबला करने से मुँह मोड़ लेना।

(ग) महादेवी वर्मा की अपनी बिल्ली का नाम क्या था?

उत्तर: महादेवी वर्मा की अपनी बिल्ली का नाम ‘राधा’ था।

(घ) लक्का कबूतर चारों ओर घूम-घूम कर कौन-सी रागिनी अलापने लगे थे?

उत्तर: लक्का कबूतर चारों ओर घूम-घूम कर ‘गुटर-गूँ’ की रागिनी अलापने लगे थे।

(ङ) ‘चिट्ठियों की अनूठी दुनिया’ शीर्षक लेख के रचयिता का नाम क्या है?

उत्तर: ‘चिट्ठियों की अनूठी दुनिया’ शीर्षक लेख के रचयिता अरविंद कुमार सिंह हैं।
7

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर संक्षेप में दो : (2×8=16)

(क) हमें मधुबन तथा मदिरालय से क्या-क्या शिक्षा मिलती हैं?

उत्तर: ‘जो बीत गई’ कविता के अनुसार, मधुबन (बगीचा) हमें सिखाता है कि जो फूल मुरझा गए या गिर गए, उन पर शोक नहीं करना चाहिए। मदिरालय (शराबघर) हमें सिखाता है कि जो प्याले टूट गए, उन पर पछताने के बजाय जो मौजूद हैं, उनका आनंद लेना चाहिए। अर्थात, हमें अतीत के नुकसान पर दुखी होने के बजाय वर्तमान में जीना सीखना चाहिए।

(ख) ‘जो बीत गयी’ कविता में सितारे को प्रतीक बनाया गया है। वह किसका प्रतीक हो सकता है, स्पष्ट करो।

उत्तर: ‘जो बीत गई’ कविता में सितारे प्रियजनों या प्रिय वस्तुओं के प्रतीक हैं जो हमसे बिछड़ गए हैं। कवि कहते हैं कि जिस तरह आकाश टूटे हुए तारों पर शोक नहीं मनाता, उसी तरह हमें भी अपने प्रियजनों के बिछड़ जाने के दुख में डूबे नहीं रहना चाहिए और जीवन में आगे बढ़ना चाहिए।

(ग) ‘कायर मत बन’ शीर्षक कविता में कवि ने कैसे जीवन को जीवन नहीं माना है?

उत्तर: ‘कायर मत बन’ कविता में कवि ने बाधाओं और कठिनाइयों से समझौता करने वाले, आँसू बहाने वाले और किसी के आगे गिड़गिड़ाने वाले जीवन को जीवन नहीं माना है। उनके अनुसार, सच्चा जीवन वह है जो संघर्ष करता है और किसी भी परिस्थिति में हार नहीं मानता।

(घ) “मानवता ने सींचा तुझको, बहा युगों तक खून-पसीना!” इसमें कवि ने मनुष्य को कौन-सा संदेश दिया है?

उत्तर: इस पंक्ति के माध्यम से कवि मनुष्य को यह संदेश देना चाहते हैं कि तुम्हारा अस्तित्व अनगिनत पीढ़ियों के त्याग, परिश्रम और बलिदान का परिणाम है। तुम्हें अपने पूर्वजों के इस महान योगदान को व्यर्थ नहीं जाने देना चाहिए और मानवता की रक्षा के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए।

(ङ) “इन तीन पक्षियों ने मुझे पक्षी-प्रकृति की विभिन्नता का जो परिचय दिया है, वह मेरे लिए विशेष महत्व रखता है।” यहाँ लेखिका ने कौन-सी विभिन्नता की बात उठाई है, स्पष्ट करो।

उत्तर: यहाँ लेखिका महादेवी वर्मा ने नीलकंठ (मोर), राधा (मोरनी) और कुब्जा (लक्का कबूतरी) के स्वभाव की विभिन्नता की बात उठाई है। नीलकंठ वीर, संरक्षक और स्नेही था। राधा उसकी सहचरी थी, शांत और प्रेमपूर्ण। वहीं कुब्जा ईर्ष्यालु, झगड़ालू और क्रूर स्वभाव की थी। यह दिखाता है कि पक्षियों में भी मनुष्यों की तरह अच्छे और बुरे, दोनों स्वभाव पाए जाते हैं।

(च) ‘नीलकंठ’ शीर्षक लेख के आधार पर ‘बड़े मियाँ’ के चरित्र की किन्हीं दो विशेषताओं को रेखांकित करो।

उत्तर: ‘बड़े मियाँ’ के चरित्र की दो विशेषताएँ हैं:
1. वाचालता: वे बहुत बातूनी थे और उनकी बातें कभी खत्म नहीं होती थीं।
2. व्यावसायिकता: वे एक कुशल पक्षी विक्रेता थे और अपने व्यवसाय में माहिर थे, जानते थे कि ग्राहक को कैसे आकर्षित करना है।

(छ) नीलकंठ और राधा की सबसे प्रिय ऋतु क्यों वर्षा ही थी?

उत्तर: वर्षा ऋतु नीलकंठ और राधा की सबसे प्रिय ऋतु थी क्योंकि बादलों के घिर आने पर मेघों की गर्जना सुनकर नीलकंठ अपने पंख फैलाकर आनंदमग्न होकर नृत्य करता था और राधा भी उसके साथ नृत्य में शामिल होती थी। यह दृश्य उनके प्राकृतिक उल्लास और सौंदर्य को चरम पर पहुँचा देता था।

(ज) महादेवी वर्मा ने मोर और मोरनी के क्या-क्या नाम रखे और वे नाम क्यों रखे थे?

उत्तर: महादेवी वर्मा ने मोर की गरदन नीली होने के कारण उसका नाम ‘नीलकंठ’ रखा। मोरनी सदा मोर की छाया के समान उसके साथ रहती थी, इसलिए उसका नाम ‘राधा’ रखा।
8

‘नीलकंठ’ पाठ के आधार पर महादेवी के प्रकृति-प्रेम का परिचय दो। (5)

उत्तर: ‘नीलकंठ’ पाठ महादेवी वर्मा के गहरे प्रकृति-प्रेम का जीवंत प्रमाण है। उनका घर विभिन्न प्रकार के पशु-पक्षियों का निवास स्थान था, जिन्हें वे केवल पालतू जानवर नहीं, बल्कि परिवार का सदस्य मानती थीं। वे हर जीव की भावनाओं, स्वभाव और जरूरतों को बारीकी से समझती थीं। नीलकंठ के शौर्य, राधा के प्रेम और कुब्जा की ईर्ष्या का जैसा सूक्ष्म चित्रण उन्होंने किया है, वह बिना गहरे लगाव के संभव नहीं है। वे घायल पक्षियों को घर लातीं, उनकी देखभाल करतीं और उनके स्वाभाविक विकास के लिए उचित वातावरण प्रदान करती थीं। उनका प्रकृति-प्रेम केवल सौंदर्य तक सीमित नहीं था, बल्कि उसमें करुणा, जिम्मेदारी और गहरा भावनात्मक जुड़ाव भी शामिल था।
9

निम्नलिखित में से किसी एक विषय पर निबंध लिखो : (8)

(क) खेल-कूद की आवश्यकता

उत्तर:

प्रस्तावना:

“स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क का निवास होता है।” यह कहावत खेल-कूद के महत्व को स्पष्ट रूप से दर्शाती है। आज के आधुनिक और तनावपूर्ण जीवन में खेल-कूद की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। यह केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि शारीरिक, मानसिक और सामाजिक विकास का एक अनिवार्य अंग है।

शारीरिक लाभ:

नियमित रूप से खेल-कूद में भाग लेने से हमारा शरीर सक्रिय और सुडौल बनता है। रक्त संचार सुचारू रूप से होता है, पाचन शक्ति मजबूत होती है और मांसपेशियाँ बलवान बनती हैं। खेलने से शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, जिससे हम अनेक बीमारियों से बचे रहते हैं। मोटापा, मधुमेह और हृदय रोग जैसी समस्याओं से बचने के लिए खेल-कूद एक उत्तम उपाय है।

मानसिक लाभ:

खेल-कूद का हमारे मानसिक स्वास्थ्य पर भी गहरा प्रभाव पड़ता है। खेलने से तनाव और चिंता दूर होती है और मन प्रसन्न रहता है। मैदान में खेलते समय हमें तुरंत निर्णय लेने पड़ते हैं, जिससे हमारी निर्णय क्षमता और एकाग्रता बढ़ती है। हार और जीत को समान भाव से स्वीकार करना हमें खेल ही सिखाता है, जो जीवन की चुनौतियों का सामना करने में हमारी मदद करता है।

सामाजिक और नैतिक विकास:

खेल हमें अनुशासन, सहयोग और टीम-भावना सिखाते हैं। जब हम एक टीम के रूप में खेलते हैं, तो हम व्यक्तिगत स्वार्थ से ऊपर उठकर टीम की जीत के लिए प्रयास करते हैं। इससे हमारे अंदर सहयोग, सहिष्णुता और नेतृत्व जैसे सामाजिक गुणों का विकास होता है। खेल के नियम हमें नियमों का पालन करना और दूसरों का सम्मान करना सिखाते हैं।

उपसंहार:

निष्कर्षतः, खेल-कूद विद्यार्थियों और युवाओं के सर्वांगीण विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है। यह हमें न केवल शारीरिक रूप से स्वस्थ रखता है, बल्कि मानसिक रूप से मजबूत और सामाजिक रूप से कुशल बनाता है। इसलिए, माता-पिता और शिक्षकों को बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ खेल-कूद में भाग लेने के लिए भी प्रोत्साहित करना चाहिए।

10

बाढ़ के कारण अपने विद्यालय में होने वाली पढ़ाई के नुकसान की भरपाई हेतु अतिरिक्त कक्षाओं की व्यवस्था करने के लिए प्रार्थना करते हुए प्रधान शिक्षक/प्रधान शिक्षिका को एक पत्र लिखो। (5)

उत्तर:
दिनांक: (आज की तारीख)
सेवा में,
श्रीमान प्रधान शिक्षक महोदय,
(अपने विद्यालय का नाम),
(विद्यालय का पता),
(शहर का नाम)।
विषय: अतिरिक्त कक्षाओं की व्यवस्था हेतु प्रार्थना-पत्र।
महोदय,
सविनय निवेदन यह है कि मैं आपके विद्यालय में कक्षा दसवीं का छात्र हूँ। जैसा कि आप जानते हैं, पिछले सप्ताह शहर में आई भीषण बाढ़ के कारण विद्यालय में लगभग दस दिनों तक अवकाश रहा। इस अप्रत्याशित अवकाश के कारण हमारी पढ़ाई का बहुत नुकसान हुआ है और पाठ्यक्रम काफी पीछे रह गया है।
आगामी बोर्ड परीक्षाएँ निकट हैं और हम सभी छात्र पाठ्यक्रम को लेकर चिंतित हैं। यदि समय पर पाठ्यक्रम पूरा नहीं हुआ तो हमारा परीक्षा परिणाम प्रभावित हो सकता है।
अतः, आपसे विनम्र अनुरोध है कि हम छात्रों की पढ़ाई के नुकसान की भरपाई के लिए विद्यालय समय के बाद या अवकाश के दिनों में कुछ अतिरिक्त कक्षाओं की व्यवस्था करने की कृपा करें, ताकि हमारा पाठ्यक्रम समय पर पूरा हो सके। हम सभी छात्र आपके इस कृपा-कार्य के लिए सदा आभारी रहेंगे।
धन्यवाद।

आपका आज्ञाकारी छात्र,
(आपका नाम)
कक्षा – X
अनुक्रमांक – (आपका रोल नंबर)
दिनांक: (आज की तारीख)
11

निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर उसके नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर दो :

(क) हृदय की वाणी कौन-सी भाषा बनती है? (1)

उत्तर: अपनी मातृभाषा ही हृदय की वाणी बनती है।

(ख) अपनी भाषा की क्या-क्या विशेषताएँ होती हैं? (2)

उत्तर: अपनी भाषा में माँ की ममता, पिता का प्यार, पड़ोसियों का स्नेह और मन तथा देश का दर्द जैसी भावनाएँ व्यक्त की जा सकती हैं। यह केवल मस्तिष्क की नहीं, बल्कि हृदय की वाणी होती है।

(ग) भाषा का क्या काम है? (1)

उत्तर: भाषा का काम अन्य विद्याओं को जानना और अपने भावों को प्रकट करना है।

(घ) विदेशी भाषा सीखने में व्यावहारिक दृष्टि से क्या नुकसान होता है? (1)

उत्तर: विदेशी भाषा सीखने में हमारे जीवन के दस-बारह वर्ष व्यर्थ बरबाद हो जाते हैं, क्योंकि उसे सीखने में बहुत समय लगता है।

(ङ) उपर्युक्त गद्यांश का एक सार्थक शीर्षक दो। (1)

उत्तर: गद्यांश का सार्थक शीर्षक “मातृभाषा का महत्व” हो सकता है।
12

निम्नलिखित वाक्यों का हिन्दी में अनुवाद करो : (1×5=5)

(क) What class do you read in?

उत्तर: तुम किस कक्षा में पढ़ते हो?

(ख) Hindi is the Official Language of India.

उत्तर: हिन्दी भारत की राजभाषा है।

(ग) May I help you?

उत्तर: क्या मैं आपकी मदद कर सकता हूँ?

(घ) The State of Assam is full of natural resources.

उत्तर: असम राज्य प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर है।

(ङ) The Sun sets in the west.

उत्तर: सूर्य पश्चिम में अस्त होता है।

📚 HSLC Hindi (E) Paper 2025 With Complete Solutions

Board Examination Paper with Detailed Answers

Full Marks: 100 | Pass Marks: 30 | All Questions Answered

Leave a Comment

Stay informed about the latest Educational Update website. We provide timely and accurate information on upcoming Exam, application deadlines, exam schedules, and more.

📱 Get AssamWeb App

Unlock free PDFs, mock tests, and certificates with our mobile app. Faster, smoother, and made for students 📚✨

🚀 Install from Play Store One-time reminder • No spam